राजस्थान की वनस्पति - 25 महत्वपूर्ण प्रश्न
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति: वनों के प्रकार एवं वितरण
राजस्थान की भौगोलिक विविधता के कारण यहाँ की वनस्पति में भी अत्यधिक भिन्नता पाई जाती है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 9.60% भाग वनाच्छादित है। अरावली पर्वतमाला यहाँ की वनस्पति के वितरण को मुख्य रूप से प्रभावित करती है।
1. वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण
शासन की दृष्टि से राजस्थान के वनों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है:
- आरक्षित वन (Reserved Forests): यहाँ लकड़ी काटना और पशु चराना पूर्णतः वर्जित है। (सर्वाधिक उदयपुर में)
- सुरक्षित/रक्षित वन (Protected Forests): सरकारी नियमों के तहत सीमित छूट दी जाती है। (सर्वाधिक बारां में)
- अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests): जहाँ कोई प्रतिबंध नहीं होता। (सर्वाधिक बीकानेर में)
2. जलवायु के आधार पर वनों के प्रकार
| वन का प्रकार | प्रमुख क्षेत्र | मुख्य वृक्ष |
|---|---|---|
| शुष्क कांटेदार (मरुद्भिद) | पश्चिमी राजस्थान (थार) | खेजड़ी, रोहिड़ा, कैर |
| शुष्क सागवान वन | दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा) | सागवान, महुआ, तेंदू |
| धौकड़ा वन (सर्वाधिक) | अरावली के मध्यवर्ती भाग | धोक, खैर, नीम |
| उपोष्ण सदाबहार वन | माउंट आबू (सिरोही) | आम, बांस, जामुन |
3. राज्य के प्रतीक वृक्ष और पुष्प
राजस्थान की वनस्पति में खेजड़ी (Prosopis cineraria) का स्थान सर्वोच्च है, जिसे 'राजस्थान का कल्पवृक्ष' कहा जाता है। इसे 1983 में राज्य वृक्ष घोषित किया गया था। वहीं, रोहिड़ा के फूल को 'राजस्थान की मरुशोभा' कहा जाता है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य: 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' 1972 के तहत राजस्थान में वनों और वन्यजीवों के संरक्षण हेतु कड़े प्रयास किए जा रहे हैं। ऊपर दी गई क्विज़ के जरिए आप राजस्थान की वनस्पति से जुड़े कठिन प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं।

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