राजस्थान के लोक नृत्य Quiz
1. राजस्थान का राज्य नृत्य कौन सा है?
2. प्रसिद्ध 'गीदड़ नृत्य' किस क्षेत्र का है?
3. 'अग्नि नृत्य' किस संप्रदाय द्वारा किया जाता है?
4. बम नृत्य कहाँ का प्रसिद्ध है?
5. 'तेरहताली नृत्य' किस लोक देवता को समर्पित है?
6. 'ढोल नृत्य' को प्रकाश में लाने का श्रेय किसे दिया जाता है?
7. गुलाबो सपेरा किस नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं?
8. वालर नृत्य किस जनजाति का है?
9. 'नृत्य का सिरमौर' किस नृत्य को कहा जाता है?
10. छिद्रित मटके जिसमें दीपक जलता है, किस नृत्य की विशेषता है?
अगले 10 प्रश्नों के लिए तैयार हैं? हमसे जुड़ें:
11. 'चरी नृत्य' मुख्य रूप से किस जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है?
12. फलकू बाई का संबंध किस नृत्य से है?
13. बिंदोरी नृत्य कहाँ का प्रसिद्ध है?
14. हाथीमणा नृत्य किस जनजाति द्वारा किया जाता है?
15. लांगुरिया नृत्य किस मेले का मुख्य आकर्षण है?
16. तलवारों की गैर कहाँ की प्रसिद्ध है?
17. धाकड़ नृत्य किस जनजाति का है?
18. मछली नृत्य राजस्थान के किस क्षेत्र में किया जाता है?
19. द्विचक्की नृत्य किस अवसर पर किया जाता है?
20. 'पेजण नृत्य' किस क्षेत्र में दीपावली के अवसर पर किया जाता है?
राजस्थान के लोकनृत्य: परंपरा, लय और क्षेत्रीय विविधता
राजस्थान की लोक संस्कृति में नृत्यों का विशेष महत्व है। यहाँ के लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ के जनजीवन, वीरता और भक्ति के प्रतिबिंब हैं। राजस्थान के नृत्यों को मुख्य रूप से क्षेत्रीय, जातीय और व्यावसायिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
1. प्रमुख क्षेत्रीय लोकनृत्य (Regional Dances)
ये नृत्य विशिष्ट क्षेत्रों में अपनी अनूठी पहचान रखते हैं:
- घूमर (राज्य नृत्य): इसे 'नृत्यों का सिरमौर' और 'राजस्थान की आत्मा' कहा जाता है। यह मुख्यतः महिलाओं द्वारा मांगलिक अवसरों पर किया जाता है।
- गीदड़ नृत्य (शेखावाटी): यह होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। इसमें नगाड़ा वाद्य यंत्र का प्रयोग होता है।
- ढोल नृत्य (जालौर): यह विवाह के अवसर पर किया जाता है। इसे 'थाकना' शैली में बजाया जाता है।
2. जातीय एवं व्यावसायिक नृत्य
| नृत्य का नाम | जाति / वर्ग | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| कालबेलिया | कालबेलिया जाति | यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची (2010) में शामिल। |
| तेरहताली | कामिड़ पंथ की महिलाएँ | रामदेव जी के मेले में 13 मंजिरों के साथ। |
| गवरी (राई) | भील जनजाति | मेवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकनाट्य नृत्य। |
| चरी नृत्य | गुर्जर जाति | फलकू बाई इसकी प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं। |
3. अग्नि नृत्य और बम नृत्य
अग्नि नृत्य: इसका उद्गम कतरियासर (बीकानेर) में हुआ। यह जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध पुरुषों द्वारा धधकते अंगारों पर 'फते-फते' कहते हुए किया जाता है। वहीं बम नृत्य भरतपुर और अलवर क्षेत्र का प्रसिद्ध नृत्य है, जो फाल्गुन की मस्ती में 'नगाड़े' की थाप पर किया जाता है।
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