राजस्थान की लोक देवियां Quiz - 1
1. करणी माता का प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है?
2. जीण माता का मंदिर किस जिले में स्थित है?
3. 'थार की वैष्णो देवी' किसे कहा जाता है?
4. किस देवी को 'चेचक की देवी' माना जाता है?
5. जैसलमेर के भाटी राजवंश की कुलदेवी कौन है?
6. 'चूहों वाली देवी' के रूप में कौन विख्यात है?
7. जोधपुर के राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता की कितनी भुजाएं हैं?
8. किस देवी के मंदिर में दीपक की लौ से केसर टपकती है?
9. जालौर के सोनगरा चौहानों की कुलदेवी है-
10. वह एकमात्र देवी जिसकी पीठ की पूजा की जाती है?
11. आमेर की शिला देवी की मूर्ति मानसिंह कहाँ से लाए थे?
12. सांभर झील में किस देवी का मंदिर स्थित है?
13. मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी कौन है?
14. आउवा के ठाकुरों की कुलदेवी कौन थी?
15. 'सफेद चूहों' को करणी माता के मंदिर में क्या कहते हैं?
राजस्थान की लोक देवियाँ: दिव्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत
राजस्थान की भूमि न केवल वीरों की है, बल्कि यह उन शक्ति स्वरूपा लोक देवियों की भी कर्मस्थली रही है जिन्होंने समाज सुधार और धर्म रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। राजस्थान में लोक देवियों को 'शक्ति के अवतार' के रूप में पूजा जाता है।
1. प्रमुख लोक देवियाँ और उनके मंदिर
राजस्थान की कुछ प्रमुख देवियाँ जिनका प्रभाव संपूर्ण राज्य में है:
- करणी माता (देशनोक, बीकानेर): इन्हें 'चूहों की देवी' कहा जाता है। सफेद चूहों को यहाँ 'काबा' कहा जाता है। ये बीकानेर के राठौड़ वंश की कुलदेवी हैं।
- जीण माता (रेवासा, सीकर): इनका लोक गीत राजस्थान साहित्य में सबसे लंबा है। इन्हें चौहान वंश की आराध्य देवी माना जाता है।
- शीला देवी (आमेर, जयपुर): इनकी मूर्ति राजा मानसिंह प्रथम बंगाल से लाए थे। यह कच्छावा वंश की आराध्य देवी हैं।
2. कुलदेवियाँ एवं संबंधित वंश / जाति
| देवी का नाम | स्थान | कुलदेवी / जाति |
|---|---|---|
| बाण माता | चित्तौड़गढ़ | मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की कुलदेवी। |
| आई माता | बिलाड़ा (जोधपुर) | सीरवी जाति की कुलदेवी (दीपक से केसर टपकती है)। |
| नारायणी माता | बरवा डूंगरी (अलवर) | नाई समाज की कुलदेवी। |
| स्वांगिया माता | जैसलमेर | जैसलमेर के भाटी राजवंश की कुलदेवी। |
3. अन्य महत्वपूर्ण लोक देवियाँ
शीतला माता (चाकसू, जयपुर): इन्हें 'चेचक की देवी' और 'सेढल माता' भी कहा जाता है। इनका वाहन गधा और पुजारी कुम्हार होता है। इनका मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतलाष्टमी) को भरता है। इसी प्रकार कैला देवी (करौली) के मंदिर में 'लांगुरिया' गीत गाए जाते हैं, जो परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
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